सहजयोग आज का महायोग

सहजयोग संस्थापिका परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी –
मनुष्य की बुद्धि स्वतंत्र है I परमेश्वर ने उन्हें स्वतंत्रता दी है I उसे अद्भुत शक्ति का ज्ञान हो यही उस विराट परमेश्वर की इच्छा है Iअब तक सहजयोग में बहुत से लोग सहज ही पार हुए है I अब सहजयोग एक ऊंचाई पर आकर टिका है Iउसे आपको महायोग कहना होगाI जब तक कुण्डलिनी शक्ति जागृत होकर ब्रह्मरन्द्र का छेदन नहीं करती तब तक योग हुआ कैसे कह सकते है ? अब तक जितने भी योग के वर्णन है वे सारे योग की पूर्व तयारी है I परन्तु सहजयोग में जिस समय कुण्डलिनी शक्ति का उत्थान होता है उस समय ये सारे योग अपने आप घटित होते है Iकुण्डलिनी शक्ति सहस्त्रार तक आती है और जिस समय कुण्डलिनी शक्ति सहस्त्रार में आकर ब्रह्मरन्द्र का छेदन करती है उस समय ‘महायोग’ घटित होता है ,इसीलिए सहजयोग जो अनादि है वह आपके साथ ही जन्म लेता है और आपके साथ ही अनेक जन्मो से चलकर आया है इसे महायोग मानना चाहिए I आप सभी ‘महायोग ‘ पाने की स्थिति में पहुंच चुके है अब आपके गुरुतत्व के फलित होने का समय आया है I पहले सद्गुरु दो तीन शिष्य रखते थे परन्तु जब तक यह बात सर्वसामान्य मनुष्य तक ,सारे जनसमुदाय तक नहीं पहुँचती तब तक उसका क्या अर्थ है ? अब यह ज्ञान आम जनता तक पहुँचाने का समय आ गया है , क्योकि आपकी अंतर्रचना ज्ञान मिलने के लिए परिपक्व है केवल स्त्रोत से जुड़ना बाकी है I

आत्म साक्षात्कार

सहजयोग द्वारा आत्म- साक्षात्कार कर जानें स्वयं को , अपने भीतर की उस परम शक्ति को जो आपके जीवन का पोषण कर आपको सुख शांति और आनंद प्रदान कर रही है I आओ चलें पूर्ण श्रद्धा और विश्वास से  सहजयोग  के पथ पर और पहचानें अपने भीतरी विराजित परम परमेश्वर को I

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